प्रागितिहास
प्रागितिहास
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मानव इतिहास और
प्रागितिहास
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प्रागितिहास
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देवासं
आज से लगभग 27000 साल पहले फ़्रान्स की एक गुफ़ा में एक प्रागैतिहासिक मानव ने अपने हाथ के इर्दगिर्द कालख लगाकर यह छाप छोड़ी
प्रागितिहास (Prehistory) इतिहास के उस काल को कहा जाता है जब मानव तो अस्तित्व में थे लेकिन जब लिखाई का आविष्कार न होने से उस काल का कोई लिखित वर्णन नहीं है।[1] मानव प्रागितिहास, पत्थर के उपकरण का उपयोग 3.3 मिलियन साल पहले होमिनिन्स और लेखन प्रणालियों के आविष्कार के बीच की अवधि है। सबसे पहले लेखन प्रणाली 5,300 साल पहले दिखाई दी थी, लेकिन लेखन को व्यापक रूप से अपनाया जाने में हजारों साल लग गए, और 19 वीं शताब्दी तक या वर्तमान तक भी कुछ मानव संस्कृतियों में इसका उपयोग नहीं किया गया था। मेसोपोटामिया में सुमेर, सिंधु घाटी सभ्यता और प्राचीन मिस्र अपनी खुद की लिपियों को विकसित करने और ऐतिहासिक रिकॉर्ड रखने वाली पहली सभ्यताएं थीं; यह शुरुआती कांस्य युग के दौरान पहले से ही था। इस काल में मानव-इतिहास की कई महत्वपूर्ण घटनाएँ हुई जिनमें हिमयुग, मानवों का अफ़्रीका से निकलकर अन्य स्थानों में विस्तार, आग पर स्वामित्व पाना, कृषि का आविष्कार, कुत्तों व अन्य जानवरों का पालतू बनना इत्यादि शामिल हैं। ऐसी चीज़ों के केवल चिह्न ही मिलते हैं, जैसे कि पत्थरों के प्राचीन औज़ार, पुराने मानव पड़ावों का अवशेष और गुफाओं की कला। पहिये का आविष्कार भी इस काल में हो चुका था जो प्रथम वैज्ञानिक आविष्कार था। प्रागैतिहासिक काल में मानवों का वातावरण बहुत भिन्न था। अक्सर मानव छोटे क़बीलों में रहते थे और उन्हें जंगली जानवरों से जूझते हुए शिकारी-फ़रमर जीवन व्यतीत करना पड़ता था। विश्व की अधिकतर जगहें अपनी प्राकृतिक स्थिति में थीं।[2] ऐसे कई जानवर थे जो आधुनिक दुनिया में नहीं मिलते, जैसे कि मैमथ और बालदार गैंडा।[3] विश्व के कुछ हिस्सों में आधुनिक मानवों से अलग भी कुछ मानव जातियाँ थीं जो अब विलुप्त हो चुकी हैं, जैसे कि यूरोप और मध्य एशिया में रहने वाले निअंडरथल मानव। अनुवांशिकी अनुसन्धान से पता चला है कि भारतीयों-समेत सभी ग़ैर-अफ़्रीकी मानव कुछ हद तक इन्ही निअंडरथलों की संतान हैं, यानि आधुनिक मानवों और निअंडरथलों ने आपस में बच्चे पैदा किये थे।[4]
इतिहासकार प्रागैतिहास को कई श्रेणियों में बांटते हैं। एक ऐसी विभाजन प्रणाली में तीन युग बताए जाते हैं:
पाषाण युग - जब औज़ार व हथियार केवल पत्थर के ही बनते थे।
कांस्य युग - जब औज़ार व हथियार कांसे (ब्रॉन्ज़) के बनाने लगे।
लौह युग - जब औज़ारो व हथियारों में लोहे का इस्तेमाल शुरू हो गया।णाषाण युग
Conclusion: पाषाण युग
णाषाण युग को तीन भागों में बाँटा गया हैं–
पुरापाषाण काल
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नवपाषाण काल
कांस्य युग
Conclusion: पाषाण युग
Cafe युग को तीन भागों में बाँटा गया हैं–
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वर्व लौह युग
इन्हें भी देखें
इतिहास
लिखित इतिहास
कारत का इतिहास
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